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तुम बिन हमरी कौन खबर ले, कमल लोचन कटि पीताम्बर, जागो बंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे, नाच्यो बहुत गोपाल - भजन

तुम बिन हमरी कौन ख़बर ले
 
तुम बिन हमरी कौन ख़बर ले 
गोवर्धन गिरधारी ,गोवर्धन गिरधारी?

भक्त मीरा की विपदा में , बस काम तुम्हीं तो आये थे ,
शंकर जी की मुश्किल में , तुम दल बादल सज धाये थे ,
मेरी भी तो आकर सुन लो , ओ जग के रखवारे 
गोवर्धन गिरधारी , गोवर्धन गिरधारी ।।
उलझ गये थे तुम्ही जाकर, दुर्योधन के पासों से,
द्रौपदी की लाज बचाई ,लम्पट कामी हाथों से,
मुझ पर भी किरपा हो जाये , अब है मोरी बारी 
गोवर्धन गिरधारी , गोवर्धन गिरधारी । ।

कमल लोचन कटि पीताम्बर

कमल लोचन कटि पीताम्बर, अधर मुरली गिरिधरम्
मुकुट कुंडल कर लकुटिया,  सांवरे राधे वरम् ।

       कूल यमुना धेनु आगे, सकल गोपिन मन हरम्
       पीत वस्त्र गरुड़ वाहन,चरण नित सुख सागरम् ।।

वंशीधर वसुदेव छलिया, बलि छल्यो हरि वामनम्
डूबते गज राख लीन्हों, लंका छेड्यो रावणम्  ।।

        दीनानाथ दयालु  सिन्धु,  करुणामय करुणाकरम्
        कविदत्त दास विलास निशदिन, नाम जप नित नागरम् ।।

कमल लोचन कटि पीताम्बर ,अधर मुरली गिरिधरम् ।।।।

जागो वंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे

जागो वंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे

रजनी बीती भोर भयो है , घर घर खुले किवारे ,
गोपी दही मथत सुनियत है कंगना के झनकारे !!
जागो वंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे

उठो लालजी भोर भयो है सुर नर ठाढे द्वारे ,
ग्वाल बाल सब करत कुलाहल ,जय जय शब्द उचारे !!
जागो वंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे

माखन रोटी हाथ में लीजे गौवन के रखवारे ,
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर ,सरन आया को तारे !!
जागो वंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे
(भजन - मीराबाई )
 

नाच्यो बहुत गोपाल


नाच्यो बहुत गोपाल अब मैं
नाच्यो बहुत गोपाल ,

काम क्रोध को पहिर चोलना
कंठ विषय की माल,
अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल

तृष्णा नाद करत घट भीतर
नाना विधि दे ताल,
भरम भयो मन भयो पखावज
चलत कुसंगत चाल,
अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल

सूरदास की सबे अविद्या
दूर करो नन्दलाल,
अब में नाच्यो बहुत गोपाल

अब मैं नाच्यों बहुत गुपाल ।

काम क्रोध को पहिरि चोलना, कंठ विषय की माल ।
महा मोह के नूपूर बाजत, निंदा शबद रसाल ।
भरम भरयो मन भयो पखावज, चलत कुसंगत चाल ।
तृष्णा नाद करत घट भीतर, नाना विधि दै ताल ।
माया को कटि फेटा बाँध्यो, लोभ तिलक दै भाल ।
कोटिक कला काँछि देखरार्इ, जल पल सुधि नहिं काल ।
सूरदास की सबै अविद्या दूरि करौ नंदलाल ।
 
 

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